इस बार वैष्णव सम्प्रदाय 25 को जन्माष्टमी मनाएगा, जबकि शैव सम्प्रदाय 24 की रात को ही जन्माष्टमी मनाएगा इस बार ज्योतिषियों के परस्पर विरोधाभास के चलते जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाएगी। वैष्णव सम्प्रदाय 25 को जन्माष्टमी मनाएगा, जबकि शैव सम्प्रदाय 24 की रात को ही जन्माष्टमी मनाएगा।

ज्योतिर्विदों के अनुसार इस बार 24 व 25 की मध्यरात्रि को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। 25 को अष्टमी और वृषभ का चंद्रमा रहेगा, जो भगवान कृष्ण के जन्म के समय था। रोहिणी नक्षत्र 12.05 बजे लगेगा, अत: जन्माष्टमी 25 को ही मनाना शास्त्र सम्मत है। पं. गुलशन अग्रवाल ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सायान्हवयापिनी अष्टमी रात्रि 12 बजे हो, उसी दिन रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था।

24 अगस्त की रात्रि 10.18 बजे तक अष्टमी तिथि लगेगी, जो दूसरे दिन अर्थात 25 अगस्त की रात्रि 8.07 बजे तक रहेगी। 25 अगस्त को दोपहर 12.27 बजे से रोहिणी नक्षत्र लगेगा, जो दूसरे दिन अर्थात 26 अगस्त को प्रात: 10.52 बजे तक रहेगा। श्री कृष्ण के जन्म की विधि अनुसार तिथि का ही सबसे ज्यादा महत्व होता है। इस वर्ष रात्रिकालीन अष्टमी तिथि 24 को मिल रही है। अत: शैव मत वाले 24 को वैष्णव मत वाले 25 को जन्माष्टमी धूमधाम से मनाएंगे।

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