अयोध्या।अयोध्या में विश्व प्रसिद्ध सावन झूला मेला समाप्त हो चुका है लेकिन मेले के दौरान हुए दर्दनाक हादसों की यादें अभी भी लोगों के जेहन पर ताजा हैं। बीते मंगलवार को राम नगरी के तुलसी नगर इलाके में यादव मंदिर की छत गिरने से दो श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद हरकत में आए प्रशासन ने बैरिकेड लगवाकर रास्ते को बंद करवा दिया और मंदिर के सामने नोटिस चस्पा कर इसके आसपास ना जाने की हिदायत दे दी। लेकिन अब सवाल ये उठता है कि, आखिरकार कब तक इस क्षेत्र में आवागमन ठप रहेगा। बल्लियां लगाकर रास्ते को बंद करने के कारण आसपास के लोगों को आने जाने में काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।

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नगरपालिका के अधिकारियों को है उच्चाधिकारियों के आदेश का इंतजार

इलाके में सड़क बंद होने की समस्या को लेकर यहां स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है वहीं नगर पालिका परिषद अयोध्या के अधिकारियों के पास इस समस्या का कोई हल नहीं है। जिला प्रशासन के निर्देश पर उन्होंने बैरिकेड लगाकर रास्ते को तो बंद करा दिया लेकिन रास्ता बंद होने के बाद इन जर्जर भवनों का आखिरकार क्या होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। आपको बता दें कि, जिस स्थान पर यह जर्जर भवन हैं उसके ठीक सामने सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल भी है जहां रोज बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। बल्लियां लगे होने के कारण स्कूल के बच्चे बल्लियों को कूदकर स्कूल जाते हैं। अब सवाल यह है कि सिर्फ बल्लियां लगा देने से क्या क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा हो जाएगी अगर वाकई में यह भवन आम लोगों के लिए खतरा है तो इस भवन को गिराया क्यों नहीं जा रहा है।

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जर्जर भवन को लेकर न्यायालय में लंबित है स्वामित्व का मुकदमा

नगर पालिका प्रशासन के सामने एक बड़ी समस्या इस बात की भी है कि, जिस जर्जर मंदिर की छत गिरने से दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई उस मंदिर के स्वामित्व को लेकर न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। ऐसे में अभी तक किसी भी पक्ष की तरफ से न्यायालय ने अपना फैसला नहीं दिया है, जिसके कारण यहां पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश हैं। ऐसे में नगरपालिका प्रशासन भी न्यायिक कार्य में बाधा नहीं डालना चाहता। इसी वजह से अभी तक इस जगह मंदिर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता है और रास्ता बंद होने से आम लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।

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